May 28, 2025

मिर्जा गालिब के 10 मशहूर शेर: मैं भी मुंह में ज़बान रखता हूं, काश पूछो कि मुद्दा क्या है

Suneet Singh

​जला है जिस्म जहां दिल भी जल गया होगा, कुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है..​

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​इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना, दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना..​

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​बस-कि दुश्वार है हर काम का आसां होना, आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसां होना..​

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​इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया, दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया..​

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​क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हां, रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन..​

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​जाते हुए कहते हो क़यामत को मिलेंगे, क्या ख़ूब क़यामत का है गोया कोई दिन और..​

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​बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे, होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे..​

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​बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब', तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं..​

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