Jun 17, 2025

मिर्जा गालिब के 10 मशहूर शेर: कोई वीरानी सी वीरानी है, दश्त को देख के घर याद आया

Suneet Singh

​हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है, तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है..​

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​खुलता किसी पे क्यूं मिरे दिल का मोआमला, शेरों के इंतिख़ाब ने रुस्वा किया मुझे​

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​न सताइश की तमन्ना न सिले की परवा, गर नहीं हैं मिरे अशआर में मअ'नी न सही​

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​कहते हैं जीते हैं उम्मीद पे लोग, हम को जीने की भी उम्मीद नहीं​

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​थी ख़बर गर्म कि 'ग़ालिब' के उड़ेंगे पुर्ज़े, देखने हम भी गए थे पर तमाशा न हुआ​

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​आईना देख अपना सा मुंह ले के रह गए, साहब को दिल न देने पे कितना ग़ुरूर था​

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​बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल, कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का​

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​हम कहां के दाना थे किस हुनर में यकता थे, बे-सबब हुआ 'ग़ालिब' दुश्मन आसमां अपना​

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