Sep 01, 2025
मंजर भोपाली के 10 शेर: इधर दर्द का प्याला छलकने वाला है, और वो कहते हैं ये दास्तान कम है
Suneet Singh
दिन भी डूबा कि नहीं ये मुझे मालूम नहीं, जिस जगह बुझ गए आंखों के दिए रात हुई
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ये अश्क तेरे मिरे राएगां न जाएंगे, उन्हीं चराग़ों से रौशन मोहब्बतें होंगी
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उन्हीं पे सारे मसाइब का बोझ रक्खा है, जो तेरे शहर में ईमान ले के आए हैं
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आंख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई, ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई
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