Sep 01, 2025

मंजर भोपाली के 10 शेर: इधर दर्द का प्याला छलकने वाला है, और वो कहते हैं ये दास्तान कम है

Suneet Singh

​दिन भी डूबा कि नहीं ये मुझे मालूम नहीं, जिस जगह बुझ गए आंखों के दिए रात हुई​

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​ये अश्क तेरे मिरे राएगां न जाएंगे, उन्हीं चराग़ों से रौशन मोहब्बतें होंगी​

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​उन्हीं पे सारे मसाइब का बोझ रक्खा है, जो तेरे शहर में ईमान ले के आए हैं​

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​आंख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई, ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई​

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​बाप बोझ ढोता था क्या जहेज़ दे पाता, इस लिए वो शहज़ादी आज तक कुंवारी है​

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​अब समझ लेते हैं मीठे लफ़्ज़ की कड़वाहटें, हो गया है ज़िंदगी का तजरबा थोड़ा बहुत​

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​ये किरदारों के गंदे आइने अपने ही घर रखिए, यहां पर कौन कितना पारसा है हम समझते हैं​

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