Dec 08, 2024

कुमार विश्वास के 10 शेर: फिर मिरी याद आ रही होगी, फिर वो दीपक बुझा रही होगी

Suneet Singh

​कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है​

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​उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे, वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे​

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​दिल के तमाम ज़ख़्म तिरी हाँ से भर गए, जितने कठिन थे रास्ते वो सब गुज़र गए​

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​मिरा ख़याल तिरी चुप्पियों को आता है, तिरा ख़याल मिरी हिचकियों को आता है​

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​जब से मिला है साथ मुझे आप का हुज़ूर, सब ख़्वाब ज़िंदगी के हमारे सँवर गए​

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​जिस्म चादर सा बिछ गया होगा, रूह सिलवट हटा रही होगी​

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​आदमी होना ख़ुदा होने से बेहतर काम है, ख़ुद ही ख़ुद के ख़्वाब की ताबीर बन कर देख ले​

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​अपने ही आप से इस तरह हुए हैं रुख़्सत, साँस को छोड़ दिया जिस सम्त भी जाना चाहे​

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​चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ, राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए​

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