Feb 26, 2026

कुमार विश्वास की कलम से: मेरी तारीफ करता है, मोहब्बत क्यों नहीं करता

Suneet Singh

​कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है।​

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​उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे, वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे।​

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​भीड़ में तो घिरा हूं मैं मगर सच कहूं, हूं मैं बिल्कुल अकेला तुम्हारे बिना।​

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​तुम्हीं पे मरता है ये दिल अदावत क्यों नहीं करता, कई जन्मों से बंदी है बगावत क्यों नही करता​

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​जिस्म चादर सा बिछ गया होगा, रूह सिलवट हटा रही होगी, फिर मिरी याद आ रही होगी।​

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​तू मुझसे दूर कैसी है, मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है।​

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​कभी तुमसे थी जो वो ही शिकायत है ज़माने से, मेरी तारीफ़ करता है मोहब्बत क्यों नहीं करता​

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​तुम्हारे जाने से जो डरता था, वो अब आने से डरता है​

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​जब से मिला है साथ मुझे आप का हुजूर, सब ख़्वाब ज़िंदगी के हमारे सँवर गए.​

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