Dec 31, 2024
जोश मलीहाबादी के मशहूर शेर: तबस्सुम की सज़ा कितनी कड़ी है, गुलों को खिल के मुरझाना पड़ा है
Suneet Singh
दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया, जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया
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हद है अपनी तरफ़ नहीं मैं भी, और उन की तरफ़ ख़ुदाई है
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मुझ को तो होश नहीं तुम को ख़बर हो शायद, लोग कहते हैं कि तुम ने मुझे बर्बाद किया
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किसी का अहद-ए-जवानी में पारसा होना, क़सम ख़ुदा की ये तौहीन है जवानी की
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सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का, जब उस ने वादा किया हम ने ए'तिबार किया
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इस दिल में तिरे हुस्न की वो जल्वागरी है, जो देखे है कहता है कि शीशे में परी है
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इस का रोना नहीं क्यूँ तुम ने किया दिल बर्बाद, इस का ग़म है कि बहुत देर में बर्बाद किया
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हम ऐसे अहल-ए-नज़र को सुबूत-ए-हक़ के लिए, अगर रसूल न होते तो सुब्ह काफ़ी थी
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सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उस ने ये इरशाद किया, जा तुझे कशमकश-ए-दहर से आज़ाद किया
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