Jul 06, 2025

जिगर मुरादाबादी के 10 मशहूर शेर: धड़कने लगा दिल नज़र झुक गई, कभी उन से जब सामना हो गया

Suneet Singh

​आंखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं, नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है​

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​गुदाज़-ए-इश्क़ नहीं कम जो मैं जवां न रहा, वही है आग मगर आग में धुआं न रहा​

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​सुना है हश्र में हर आंख उसे बे-पर्दा देखेगी, मुझे डर है न तौहीन-ए-जमाल-ए-यार हो जाए​

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​ये मय-ख़ाना है बज़्म-ए-जम नहीं है, यहां कोई किसी से कम नहीं है​

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​गुनाहगार के दिल से न बच के चल ज़ाहिद, यहीं कहीं तिरी जन्नत भी पाई जाती है​

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​या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से, कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है​

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​मुझ को नहीं क़ुबूल दो-आलम की वुसअतें, क़िस्मत में कू-ए-यार की दो-गज़ ज़मीं रहे​

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​ये राज़ सुन रहे हैं इक मौज-ए-दिल-नशीं से, डूबे हैं हम जहां पर उभरेंगे फिर वहीं से​

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​सेहन-ए-चमन को अपनी बहारों पे नाज़ था, वो आ गए तो सारी बहारों पे छा गए​

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