Sep 05, 2025
इरशाद कामिल के 10 मशहूर शेर: जिस्म जंगल नहीं हुआ कब से, चल मुझे फिर से हरा भरा कर दे
Suneet Singh
इस तरह हो तुम मेरी इस तरह पराई हो, और की गजल दैसे और ने सुनाई हो
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ईमान दुपट्टे का तेरे डोल गया फिर, नीयत ले हुई फिर से बेईमान हमारी
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ये जो बढ़ चढ़ कर दावा कर रहा है, मोहब्बत का दिखावा कर रहा है।
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मुसाफिर रातभर का ही रहा मेरे लिये तू, मैं ऐसा शहर था जिसमें तुम्हारा घर नहीं था
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शहर में सारे नाम तुम्हारा दीवारों पे लिखता है, तेरा आशिक पगला होकर भी मेे जैसा दिखता है
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एहसास हो गया तेरा नाम है नमक, सर्दी में चाक होंठ डले तेरे नाम से
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ज्यादा सही जीने की ललक में, गलत जीने का स्वाद जाता रहा
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रोज सवेरे बिखरा देखा लोगों ने, तिनका-तिनका टूटा हूं मैं रातों में
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प्यार से रात कई बार जगाया तुमने, ख्वाब इस मोड़ से आगे बढ़ाया तुमने
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