Feb 24, 2026
होली शायरी: तेरे गालों पे जब गुलाल लगा, ये जहां मुझ को लाल-लाल लगा
Suneet Singh
कब तक चुनरी पर ही ज़ुल्म हों रंगों के, रंगरेज़ा तेरी भी क़बा पर बरसे रंग
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अब की होली में रहा बे-कार रंग, और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग
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बहार आई कि दिन होली के आए, गुलों में रंग खेला जा रहा है
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पूरा करेंगे होली में क्या वादा-ए-विसाल, जिन को अभी बसंत की ऐ दिल ख़बर नहीं
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होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने, नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समां है
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वो रंग रंग के छींटे पड़े कि उस के ब'अद, कभी न फिर नए कपड़े पहन के निकला मैं
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बादल आए हैं घिर गुलाल के लाल, कुछ किसी का नहीं किसी को ख़याल
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मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली, उठो यारो भरो रंगों से झोली
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