Sep 25, 2025
हफीज जौनपुरी के मशहूर शेर: बहुत दूर तो कुछ नहीं घर मिरा, चले आओ इक दिन टहलते हुए
Suneet Singh
बोसा-ए-रुख़्सार पर तकरार रहने दीजिए, लीजिए या दीजिए इंकार रहने दीजिए
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तंदुरुस्ती से तो बेहतर थी मिरी बीमारी, वो कभी पूछ तो लेते थे कि हाल अच्छा है
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अब मुझे मानें न मानें ऐ 'हफ़ीज़', मानते हैं सब मिरे उस्ताद को
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हमें याद रखना हमें याद करना, अगर कोई ताज़ा सितम याद आए
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ज़ाहिद को रट लगी है शराब-ए-तुहूर की, आया है मय-कदे में तो सूझी है दूर की
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बुरा ही क्या है बरतना पुरानी रस्मों का, कभी शराब का पीना भी क्या हलाल न था
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याद आईं उस को देख के अपनी मुसीबतें, रोए हम आज ख़ूब लिपट कर रक़ीब से
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सच है इस एक पर्दे में छुपते हैं लाख ऐब, यानी जनाब-ए-शैख़ की दाढ़ी दराज़ है
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