Jul 25, 2025

फिराक गोरखपुरी के 10 मशहूर शेर: कोई समझे तो एक बात कहूं, इश्क तौफीक है गुनाह नहीं

Suneet Singh

​हम से क्या हो सका मोहब्बत में, ख़ैर तुम ने तो बेवफ़ाई की​

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​​​रस में डूबा हुआ लहराता बदन क्या कहना, करवटें लेती हुई सुब्ह-ए-चमन क्या कहना​​

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​रुकी रुकी सी शब-ए-मर्ग ख़त्म पर आई, वो पौ फटी वो नई ज़िंदगी नज़र आई​

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​ये नर्म नर्म हवा झिलमिला रहे हैं चराग़, तेरे ख़याल की ख़ुशबू से बस रहे हैं दिमाग़​

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​सुनते हैं इश्क़ नाम के गुज़रे हैं इक बुज़ुर्ग, हम लोग भी फ़क़ीर उसी सिलसिले के हैं​

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​इक उम्र कट गई है तिरे इंतिज़ार में, ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिन से एक रात​

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​ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख ऐ दोस्त, तिरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई​

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​इसी खंडर में कहीं कुछ दिए हैं टूटे हुए, इन्हीं से काम चलाओ बड़ी उदास है रात​

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