Apr 20, 2025

फिराक गोरखपुरी के 10 मशहूर शेर: सच तो ये है बड़े आराम से हूं, तेरे हर लहज़ा सताने की क़सम

Suneet Singh

​सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहां, ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहां​

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​ये जिंदगी है क़ौम की, तू क़ौम पे लुटाये जा, मरने की तमन्ना है तो मर, मरने से न डर जाये जा​

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​वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिल-ए-ख़ुद-बीन, आस्मां को ख़ुद अपनी आँखों से देख लेता है​

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​इश्क़ ने फिराक़ को बनाया मस्त-ए-ख़ुदा, हर ज़र्रा-ए-ख़ाक में वो जलवा-ए-बे-क़यास है​

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​ज़िंदगी क्या है, एक रहस्यमयी सैर-ए-जहां, हर क़दम पे इक नया मंज़र, इक नया इम्तिहां​

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​तुझ से बिछड़े तो मालूम हुआ मुझ को ये, ज़िंदगी एक तेरा साथ ही जीने की थी​

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​दिल की धड़कन को तूने आवाज़-ए-ख़ुदा कहा, फिराक़ की शायरी में हर लफ्ज़ है बे-बदा​

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​उम्र गुज़री है इस आस में कि आएगा कोई, अब तो बस ख़्वाब ही आते हैं, हक़ीक़त नहीं​

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​ग़म-ए-दिल सुनाने को हर एक से कहता हूं, सुनने वाला कोई नहीं, बस ख़ुद से कहता हूं​

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