Aug 06, 2025

फरहत एहसास के 10 मशहूर शेर: एक बोसे के भी नसीब न हों, होंठ इतने भी अब गरीब न हों

Suneet Singh

​इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से, मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूं नहीं करते​

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​किसी हालत में भी तन्हा नहीं होने देती, है यही एक ख़राबी मिरी तन्हाई की​

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​वो चांद कह के गया था कि आज निकलेगा, तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूं शाम से मैं​

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​सर सलामत लिए लौट आए गली से उस की, यार ने हम को कोई ढंग की ख़िदमत नहीं दी​

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​मैं रोना चाहता हूं ख़ूब रोना चाहता हूं मैं, फिर उस के बाद गहरी नींद सोना चाहता हूं मैं​

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​किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं, वो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहीं​

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​मोहब्बत फूल बनने पर लगी थी, पलट कर फिर कली कर ली है मैं ने​

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​वो अक़्ल-मंद कभी जोश में नहीं आता, गले तो लगता है आग़ोश में नहीं आता​

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​कल डूब रहा था 'फ़रहत-एहसास', हम ने भी तमाशा डट के देखा​

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