Oct 16, 2024

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के...दिल को छू जाएगी फैज अहमद फैज की ये शायरियां

Ritu raj

​और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा,राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा।​

Credit: X

​दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है, लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है।​

Credit: X

​कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब, आज तुम याद बे-हिसाब आए।​

Credit: X

​और क्या देखने को बाक़ी है, आप से दिल लगा के देख लिया।​

Credit: X

You may also like

सुधा मू्र्ति की इन बातों में छिपी है खुश...
चावल-दाल में लग गए हैं कीड़े, छुटकारा पा...

​दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के, वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के।​

Credit: X

​तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं,किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं।​

Credit: X

​नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही,नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही।​

Credit: X

​वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था, वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है।​

Credit: X

​गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले, चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।​

Credit: X

इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स

Next: सुधा मू्र्ति की इन बातों में छिपी है खुशहाल जीवन की चाभी, टूट जाएगा सारे दुखों का ताला

ऐसी और स्टोरीज देखें