Sep 12, 2025
चकबस्त के 10 शेर: ये कैसी बज्म है और कैसे उसके साकी हैं, शराब हाथ में है और पिला नहीं सकते
Suneet Singh
ज़िंदगी क्या है अनासिर में ज़ुहूर-ए-तरतीब, मौत क्या है इन्हीं अज्ज़ा का परेशां होना
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अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसां आश्ना होता, न कुछ मरने का ग़म होता न जीने का मज़ा होता
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इक सिलसिला हवस का है इंसां की ज़िंदगी, इस एक मुश्त-ए-ख़ाक को ग़म दो-जहां के हैं
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वतन की ख़ाक से मर कर भी हम को उन्स बाक़ी है, मज़ा दामान-ए-मादर का है इस मिट्टी के दामन में
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गुनहगारों में शामिल हैं गुनाहों से नहीं वाकिफ, सजा को जानते हैं हम ख़ुदा जाने ख़ता क्या है
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इस को ना-क़दरी-ए-आलम का सिला कहते हैं, मर चुके हम तो ज़माने ने बहुत याद किया
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मज़ा है अहद-ए-जवानी में सर पटकने का, लहू में फिर ये रवानी रहे रहे न रहे
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एक साग़र भी इनायत न हुआ याद रहे, साक़िया जाते हैं महफ़िल तिरी आबाद रहे
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किया है फ़ाश पर्दा कुफ़्र-ओ-दीं का इस कदर मैंने, कि दुश्मन है बरहमन और अदू शैख़-ए-हरम मेरा
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