Dec 06, 2024

सफर पर 10 बेहतरीन शायरी: ज़िंदगी यूं हुई बसर तन्हा, क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

Suneet Singh

​किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल, कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा​

- अहमद फ़राज़

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​इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई​

- राही मासूम रज़ा

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​मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा, ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा​

- साक़ी फ़ारुक़ी

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​न मंज़िलों को न हम रहगुज़र को देखते हैं, अजब सफ़र है कि बस हम-सफ़र को देखते हैं​


- अहमद फ़राज़

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​सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो, सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो​

- निदा फ़ाज़ली

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​सफ़र में ऐसे कई मरहले भी आते हैं, हर एक मोड़ पे कुछ लोग छूट जाते हैं​

- आबिद अदीब

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​डर हम को भी लगता है रस्ते के सन्नाटे से, लेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा​

- जावेद अख़्तर

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​मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर, सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना​

- साहिल सहरी नैनीताली

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​किस की तलाश है हमें किस के असर में हैं, जब से चले हैं घर से मुसलसल सफ़र में हैं​

- आशुफ़्ता चंगेज़ी

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