Apr 16, 2024

'क़ातिलों की महफ़िल में सर उठा के जाएंगे..', जोश बढ़ा देंगी ये बेहतरीन शायरी

Suneet Singh

​रौनक़ शहरी​

बुलंद हिम्मत से आसमाँ में शिगाफ़ हम से नहीं हुआ है,
शिकस्त का भी अभी तलक ए'तिराफ़ हम से नहीं हुआ है।

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​बशीर फारूकी​

खड़े हुए हैं यहाँ तो बुलंद-हिम्मत लोग,
थके हुओं को भला कौन रास्ता देगा।

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​अख्तर वाजिदी​

कितनी बुलंद हिम्मत हैं ज़िंदगी की नज़रें,
टकरा रही हैं बढ़ कर अब वक़्त की नज़र से।

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​हामी गोरखपुरी​

हम बुलंद-हिम्मत हैं तेग़ से नहीं डरते,
क़ातिलों की महफ़िल में सर उठा के जाएँगे।

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​हफीज़ जालंधरी​

हिम्मत बुलंद थी मगर उफ़्ताद देखना,
चुप-चाप आज महव-ए-दुआ हो गया हूँ मैं।

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​ज़िया जालंधरी​

हिम्मत है तो बुलंद कर आवाज़ का अलम,
चुप बैठने से हल नहीं होने का मसअला।

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​हसरत मोहानी​

पीराना-सर भी शौक़ की हिम्मत बुलंद है,
ख़्वाहान-ए-काम-ए-जाँ हैं जो उस नौजवाँ से हम।

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​तशना आज़मी​

कैसे कहूँ कि आख़िरी अपनी उड़ान है,
इस आसमाँ के बा'द भी इक आसमान है।

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​इंशा अल्लाह खान इंशा​

ज़िन्हार हिम्मत अपने से हरगिज़ न हारिए,
शीशे में उस परी को न जब तक उतारिए।

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