Jul 15, 2025
असगर गोंडवी के 10 मशहूर शेर: इक अदा इक हिजाब इक शोखी, नीची नजरों में क्या नहीं होता
Suneet Singh
चला जाता हूं हंसता खेलता मौज-ए-हवादिस से, अगर आसानियां हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए
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ज़ाहिद ने मिरा हासिल-ए-ईमां नहीं देखा, रुख़ पर तिरी ज़ुल्फ़ों को परेशां नहीं देखा
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पहली नज़र भी आप की उफ़ किस बला की थी, हम आज तक वो चोट हैं दिल पर लिए हुए
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यूं मुस्कुराए जान सी कलियों में पड़ गई, यूं लब-कुशा हुए कि गुलिस्तां बना दिया
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एक ऐसी भी तजल्ली आज मय-ख़ाने में है, लुत्फ़ पीने में नहीं है बल्कि खो जाने में है
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अक्स किस चीज़ का आईना-ए-हैरत में नहीं, तेरी सूरत में है क्या जो मेरी सूरत में नहीं
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जीना भी आ गया मुझे मरना भी आ गया, पहचानने लगा हूं तुम्हारी नज़र को मैं
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ये आस्तान-ए-यार है सेहन-ए-हरम नहीं, जब रख दिया है सर तो उठाना न चाहिए
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आलम से बे-ख़बर भी हूं आलम में भी हूं मैं, साक़ी ने इस मक़ाम को आसां बना दिया
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