Sep 28, 2025

​​अमजदइस्लाम के 10 मशहूर शेर: कुछ ऐसी बे-यकीनी थी फजा में,जो अपने थे वो बेगाने लगे हैं

Suneet Singh

​फ़ज़ा में तैरते रहते हैं नक़्श से क्या क्या, मुझे तलाश न करती हों ये बलाएं कहीं​

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​ये जो साए से भटकते हैं हमारे इर्द-गिर्द, छू के उन को देखिए तो वाहिमा कोई नहीं​

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​यूं तो हर रात चमकते हैं सितारे लेकिन, वस्ल की रात बहुत सुब्ह का तारा चमका​

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​बे-समर पेड़ों को चूमेंगे सबा के सब्ज़ लब, देख लेना ये ख़िज़ां बे-दस्त-ओ-पा रह जाएगी​

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​हादिसा भी होने में वक़्त कुछ तो लेता है, बख़्त के बिगड़ने में देर कुछ तो लगती है​

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​एक नज़र देखा था उस ने आगे याद नहीं, खुल जाती है दरिया की औक़ात समुंदर में​

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​गुज़रें जो मेरे घर से तो रुक जाएं सितारे, इस तरह मिरी रात को चमकाओ किसी दिन​

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​किस क़दर यादें उभर आई हैं तेरे नाम से, एक पत्थर फेंकने से पड़ गए कितने भंवर​

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​क्या हो जाता है इन हंसते जीते लोगों को, बैठे बैठे क्यूं ये ख़ुद से बातें करने लगते हैं​

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