Sep 27, 2025
आदिल मंसूरी के 10 मशहूर शेर: कभी ख़ाक वालों की बातें भी सुन,कभी आसमानों से नीचे उतर
Suneet Singh
सोए तो दिल में एक जहां जागने लगा, जागे तो अपनी आंख में जाले थे ख़्वाब के
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अल्लाह जाने किस पे अकड़ता था रात दिन, कुछ भी नहीं था फिर भी बड़ा बद-ज़बान था
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हम्माम के आईने में शब डूब रही थी, सिगरेट से नए दिन का धुआं फैल रहा था
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कब से टहल रहे हैं गरेबान खोल कर, ख़ाली घटा को क्या करें बरसात भी तो हो
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बिस्मिल के तड़पने की अदाओं में नशा था, मैं हाथ में तलवार लिए झूम रहा था
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न कोई रोक सका ख़्वाब के सफ़ीरों को, उदास कर गए नींदों के राहगीरों को
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फिर कोई वुसअत-ए-आफ़ाक़ पे साया डाले, फिर किसी आंख के नुक़्ते में उतारा जाऊं
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किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
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मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर, उस ने दीवारों को अपनी और ऊंचा कर दिया
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