Srishti
Jan 20, 2025
बच्चों का दिमाग कोरे कागज के जैसा होता है। वो जैसा अपने घर में, स्कूल में और आसपास में देखते हैं, वही सीखते हैं।
Credit: canva
बच्चे शुरुआती दिनों में सबसे ज्यादा समय मां-बाप के साथ गुजारते हैं। इसलिए उनके मन, मस्तिष्क, स्वभाव और व्यवहार पर सबसे ज्यादा असर भी मां-बाप का ही पड़ता है।
Credit: canva
लेकिन कई बार अंजाने में मां-बाप कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिससे बच्चों का मस्तिष्क कमजोर होता जाता है और उन्हें जीवन में आगे कई तरह की चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
Credit: canva
अगर मां-बाप इतने बिजी रहते हैं कि बच्चों को भी समय नहीं दे सकते हैं, तो इससे भी बच्चे के मानसिक विकास और सामाजिक विकास पर असर पड़ता है।
Credit: canva
बच्चों को आजाद कर देना और बिल्कुल नजर न रखने से बच्चे अपने मन की तो करते ही हैं, साथ ही कई बार कुछ गलत करने पर मां-बाप से छिपाते और झूठ भी बोलते हैं।
Credit: canva
कुछ मां-बाप बच्चों के बिगड़ने के डर से उन्हें बचपन से ही बहुत अधिक बंधन में रखते हैं लेकिन ऐसे बच्चे व्यवहारिक ज्ञान में पीछे रह जाते हैं और उनका मानसिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है।
Credit: canva
कुछ पेरेंट्स बच्चों का बात-बात पर मारते हैं लेकिन बच्चों को मारने और डांटने से उनके डिप्रेशन में जाने, विरोधी मानसिकता के पनपने और मां-बाप के प्रति गलत नजरिया बनने की स्थितियां हो सकती हैं।
Credit: canva
मां-बाप बच्चों पर किसी खास काम के लिए लगातार मानसिक दबाव बनाएं, तो ये भी एक तरह की मानसिक प्रताड़ना ही है। इससे बच्चे का मस्तिष्क ठीक तरह से विकसित भी नहीं हो पाता है।
Credit: canva
मां-बाप अपने बच्चे को प्यार करते हैं और उनकी हर जिद भी पूरी कर देते हैं। लेकिन ऐसा करने से उनका व्यवहारिक विकास अच्छी तरह नहीं हो पाता है।
Credit: canva
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स