Jan 12, 2026

​ Sunday को ही छुट्टी क्यों होती है? जानिए किस अफसर ने बनाया था ये नियम​

Piyush Kumar

​रविवार की छुट्टी का इतिहास​


आज रविवार की छुट्टी हमारी ज़िंदगी का सामान्य हिस्सा है, लेकिन इसकी शुरुआत किसी परंपरा से नहीं बल्कि एक प्रशासनिक फैसले से हुई थी, जिसने भारत की पूरी वर्क कल्चर को बदल दिया।

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​कब शुरू हुई भारत में रविवार की छुट्टी?​


भारत में पहली बार आधिकारिक रूप से रविवार की छुट्टी साल 1843 में लागू की गई, जब ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड हार्डिंज ने सरकारी दफ्तरों में साप्ताहिक अवकाश का आदेश जारी किया।

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​क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?​


ब्रिटिश शासन के दौरान कर्मचारी रोज़ 10 से 12 घंटे तक बिना छुट्टी काम करते थे। थकान, स्वास्थ्य समस्याओं और बढ़ते विरोध के कारण सरकार को एक दिन के आराम की ज़रूरत महसूस हुई।

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​पहला वर्क रिफॉर्म​


लॉर्ड हार्डिंज का यह आदेश भारत का पहला बड़ा “वर्क रिफॉर्म” माना जाता है, जिसने यह साबित किया कि बेहतर काम के लिए आराम भी उतना ही जरूरी है।

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​मजदूर आंदोलन ने बदली तस्वीर​


1880 के दशक में नारायण मेघाजी लोकहांडे ने मजदूरों के हक में आवाज़ उठाई और रविवार की छुट्टी को कानूनी अधिकार बनाने के लिए आंदोलन किया।

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​मजदूरों को मिला साप्ताहिक आराम​


सरकारी दफ्तरों से शुरू हुई रविवार की छुट्टी धीरे-धीरे फैक्ट्रियों तक पहुंची, जिससे मजदूरों को पहली बार परिवार और आराम के लिए समय मिलने लगा।

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​पूरे भारत में फैला नियम​


20वीं सदी की शुरुआत तक रविवार की छुट्टी स्कूलों, रेलवे, पोस्ट ऑफिस और निजी संस्थानों में भी लागू हो गई और यह देश की कार्यप्रणाली का हिस्सा बन गई।

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​आज का रविवार​


आज रविवार सिर्फ अवकाश नहीं, बल्कि परिवार, मानसिक शांति और सामाजिक गतिविधियों का दिन माना जाता है, जो जीवन में संतुलन बनाए रखता है।

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​एक छोटा आदेश, बड़ा असर​

180 साल पहले लिया गया एक ब्रिटिश अधिकारी का फैसला आज भारत की पूरी वर्किंग लाइफ को प्रभावित कर रहा है।

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​इतिहास की विरासत​


जिस रविवार की छुट्टी को आज हम अपना अधिकार मानते हैं, उसकी नींव औपनिवेशिक दौर में रखी गई थी, जिसने भारतीय समाज की कार्य संस्कृति को हमेशा के लिए बदल दिया।

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