Jan 04, 2025

8 दशक बाद भी हावड़ा ब्रिज इतना मजबूत क्यों?

Amit Mandal

​हावड़ा ब्रिज क्यों इतना मजबूत ​

क्या आपने कभी सोचा है कि कोलकाता का हावड़ा ब्रिज इतना मजबूत क्यों है, आज हम आपको बताते हैं।

Credit: Wikimedia

​धातु की कीलों का इस्तेमाल​

इसे बनाने में नट-बोल्ट की जगह धातु की कीलों यानी रिवेट्स का इस्तेमाल किया गया है।

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​दो पायों पर टिका​

यह पुल केवल नदी के दोनों किनारों पर बने दो पायों पर टिका है। इन दोनों पायों की ऊंचाई 280 फीट है और इनके बीच की दूरी डेढ़ हजार फीट है।

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​भारी ट्रैफिक को झेलने की ताकत​

इसका डिजाइन इतना मजबूत है कि यह रोजाना होने वाले भारी ट्रैफिक को झेल सकता है।

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​जल जमावट का बखूबी सामना​

यह पुल समुद्र जल में किसी भी तरह की जल जमावट का सामना कर सकता है।

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​पायों पर फाइबर ग्लास ​

कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने पुल को बचाने के लिए इसके स्टील के पायों को नीचे से फाइबर ग्लास से ढका है।

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​26,500 टन स्टील का इस्तेमाल​

हावड़ा ब्रिज को बनाने में 26,500 टन स्टील का इस्तेमाल हुआ था। इस पुल को रेलवे के चीफ इंजीनियर ब्रैडफोर्ड लेसली ने डिजाइन किया था।

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​1943 में बनकर तैयार​

इसका निर्माण ब्रिटिश सरकार ने 1936 में शुरू किया था और 1943 में इसे आम जनता के लिए खोला गया था.

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​रात 12 बजे कुछ देर के लिए होता है बंद ​

सुरक्षा की खातिर हावड़ा ब्रिज को रात 12 बजे कुछ देर के लिए बंद कर दिया जाता है, क्योंकि उस वक्त पानी का ऊपर का चढ़ाव और निचला चढ़ाव होता है।

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