Jan 11, 2026
किन्नरों को मुगल समाज में ‘ख्वाजासरा’ कहा जाता था। उन्हें सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सत्ता और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी दी जाती थी।
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पेल्सर्ट लिखते हैं कि किन्नर इशारे भर पर महंगे कपड़े, ताकतवर घोड़े और विलासिता का आनंद लेते थे।
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शॉन मारमॉन अपनी किताब में बताती हैं कि पैगंबर मोहम्मद के समय से ही किन्नर गार्ड और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते थे।
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इतिहासकार शादाब बानो के अनुसार, बाबर और हुमायूं के समय कम, लेकिन अकबर और उसके बाद के मुगल बादशाहों के हरम में किन्नरों की सत्ता और भूमिका बहुत मजबूत थी।
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किन्नर न केवल दरबार के मनोरंजन का हिस्सा थे, बल्कि वे सत्ता, सुरक्षा और राजनीतिक जासूसी में भी अहम भूमिका निभाते थे। मुगल हरम उनके बिना अधूरा था।
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अकबर के शासनकाल में हरम को कई लेयर में बांटा गया था। सबसे अंदर किन्नरों का सुरक्षा घेरा था, जो तय करते थे कि कौन अंदर आ सके और कौन नहीं।
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अकबरनामा में नियामत नामक किन्नर का जिक्र है, जिसने बादशाह के सौतेले भाई को हरम में प्रवेश से रोका। यह दिखाता है कि किन्नर सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि सत्ता नियंत्रक भी थे।
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किन्नर हरम में हो रही कानाफूसी पर नजर रखते थे और बादशाह तक रिपोर्ट करते थे। उनके बिना हरम की राजनीतिक समझ अधूरी थी।
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अकबर के किन्नर अफसर इतिमाद खान को हरम की सुरक्षा और वित्त जैसे जिम्मेदारियां दी गई थीं। बादशाह अकबर उनसे सलाह लिया करते थे।
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