मुगलों के बाद उनके वंशजों का क्या हुआ, क्यों भीख मांगने लगे थे शहजादे?

Amit Mandal

May 01, 2025

​मुगल साम्राज्य का पतन​

14 सितंबर, 1857 को अंग्रेजों के हाथों सत्ता गंवाने के बाद और मुगल साम्राज्य के पतन के बाद मुगलों का क्या हुआ था?

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​शहजादे के भीख मांगने का जिक्र​

एक शहजादे के भीख मांगने का जिक्र ख्वाजा हसन निजामी (1873-जुलाई 1955) की किताब 'बेगमात के आंसू' में मिलता है।

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​मिर्जा नासिर-उल मुल्क​

इस शहजादे का नाम मिर्जा नासिर-उल मुल्क था। अंग्रेजों से बचने के बाद उसने शाहजहानाबाद में अपनी बहन के साथ एक व्यापारी के घर में नौकरी कर ली थी।


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​​पांच रुपये की पेंशन​​

बाद में जब अंग्रेजों की सरकार बनी, तो दोनों को पांच रुपये महीने की पेंशन मिलने लगी। तब उन्होंने नौकरी छोड़ दी लेकिन बाद में पेंशन बंद करने पर कर्ज में डूब गए।

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​पीर बाबा के वेश में शहजादा​

कुछ सालों बाद एक पीर बाबा दिखने लगे , जो दिखने में खानदानी लगते थे और चितली कब्र और कमर बंगाश के इलाके में दिखाई देते थे।

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​चुपचाप मांगते थे मदद​

वो ठीक से चल भी नहीं सकते थे। उनके गले में एक झोला होता था और वो आने-जाने वालों से चुपचाप मदद मांगते थे।

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​बहादुरशाह के पोते​

किसी ने उनके बारे में पूछा तो बताया गया कि उनका नाम मिर्जा नासिर-उल-मुल्क है और वो बहादुरशाह के पोते हैं।

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​गलियों में भीख मांगते थे कमर सुल्तान​

बहादुरशाह जफर की बेटी कुरैशिया बेगम का बेटा भी शाहजहानाबाद की गलियों में भीख मांग रहा था, जिसका नाम मिर्जा कमर सुल्तान बहादुर था।

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​​सिर्फ रातों में निकलता था​​

वो सिर्फ रातों में निकलता था, क्योंकि दिन में जब उसे जानने वाले उसे देखते थे, तो उसे सलाम करते थे और उन्हें इस बात से शर्म आती थी।

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