Dec 12, 2025
भारत का इतिहास काफी समृद्ध और वैभवशाली है और यहां राजा-महाराजाओं के तमाम वैभवशाली किस्से हैं
Credit: wikimedia/social media
वहीं भारत के इतिहास में वफादारी के साथ ही दगाबाजी के भी कई किस्से इतिहास में दर्ज हैं
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यहां दिल्ली के एक शख्स जिसका नाम भवानी शंकर खत्री था और वो अंग्रेजों के वफादार
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साल 1857 की क्रांति के वक्त अंग्रेजों के वफादार भवानी शंकर खत्री की हवेली का नाम 'नमक हराम की हवेली' पड़ गया
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इसका नाम 'नमक हराम की हवेली कैसे पड़ गया इसके पीछे एक कहानी है भवानी शंकर खत्री पहले इंदौर के महाराजा यशवंतराव होलकर के वफादार थे
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बाद में भवानी शंकर खत्री दिल्ली आ गया और अंग्रेजों से मिल गए, उन्होंने अंग्रेजों को होलकर और मराठा सेना की तमाम खुफिया जानकारियां दीं
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साल 1803 इंदौर के महाराजा यशवंतराव होलकर और अंग्रेजी फौज के बीच दिल्ली में आमने-सामने की लड़ाई हुई जिसमें मराठों की हार हुई
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इसके बाद भवानी शंकर खत्री की वफादारी से खुश होकर अंग्रेजों ने उसे चांदनी चौक में एक शानदार हवेली गिफ्ट में दे दी और वह अपने परिवार संग यहां रहने लगे
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इस हवेली का नाम 'नमक हराम की हवेली' मशहूर हो गया और उस हवेली वाली गली से जो कोई गुजरता वह 'नमक हराम' या गद्दार चिल्लाते हुए निकलता था
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