May 12, 2025
भारत का इतिहास काफी वैभवशाली और समृद्ध रहा है और यहां राजा-महाराजाओं के तमाम वीरता के किस्से हैं
Credit: wikimedia/social media
पर इसके साथ ही भारत के इतिहास में वफादारी के साथ ही दगाबाजी के भी कई किस्से इतिहास में दर्ज हैं
Credit: wikimedia/social media
यहां दिल्ली के एक शख्स जिसका नाम भवानी शंकर खत्री था और वो अंग्रेजों के वफादार थे
Credit: wikimedia/social media
इतिहासकारों के मुताबिक साल 1857 की क्रांति के वक्त अंग्रेजों के वफादार भवानी शंकर खत्री की हवेली का नाम 'नमक हराम की हवेली' पड़ गया
Credit: wikimedia/social media
इसका नाम 'नमक हराम की हवेली कैसे पड़ गया इसके पीछे एक कहानी है बताते हैं कि भवानी शंकर खत्री पहले इंदौर के महाराजा यशवंतराव होलकर के वफादार थे
Credit: wikimedia/social media
बाद में भवानी शंकर खत्री दिल्ली आ गया और अंग्रेजों से मिल गए, उन्होंने अंग्रेजों को होलकर और मराठा सेना की तमाम खुफिया जानकारियां दीं
Credit: wikimedia/social media
साल 1803 इंदौर के महाराजा यशवंतराव होलकर और अंग्रेजी फौज के बीच दिल्ली में आमने-सामने की लड़ाई हुई जिसमें मराठों की हार हुई
Credit: wikimedia/social media
इसके बाद भवानी शंकर खत्री की वफादारी से खुश होकर अंग्रेजों ने उसे दिल्ली के चांदनी चौक में एक शानदार हवेली गिफ्ट में दे दी और वह अपने परिवार संग यहां रहने लगे
Credit: wikimedia/social media
उस हवेली का नाम 'नमक हराम की हवेली' प्रसिद्ध हो गया और उस हवेली वाली गली से जो कोई गुजरता वह 'नमक हराम' या गद्दार चिल्लाते हुए निकलता था
Credit: wikimedia/social media
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स