Apr 08, 2025
दूसरे मुगल बादशाह हुमायूं को अपने साम्राज्य पर नियंत्रण बनाए रखने के संघर्ष के लिए याद किया जाता है। उसे सबसे कमजोर और अभागा बादशाह माना जाता है।
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हुमायूं 26 दिसंबर, 1530 को 22 वर्ष की उम्र में सिंहासन पर बैठा था। उनके शासनकाल में आंतरिक संघर्ष और प्रतिद्वंद्वियों से युद्ध चलता रहा।
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6 मार्च, 1508 को काबुल में जन्मा हुमायूं मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का बेटा था और पूरी उम्र युद्ध करता रहा और दर-दर भटकता रहा।
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हुमायूं के शासन में अस्थिरता और लगातार हार हावी रही, जिसने उसे इतिहास के सबसे कमजोर मुगल बादशाहों में से एक बना दिया।
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उसके सौतेले भाई कामरान मिर्जा को काबुल और कंधार विरासत में मिले, जिससे परिवार के भीतर सत्ता संघर्ष शुरू हो गया। इसने मुगल शासन को कमजोर कर दिया।
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हुमायूं को गुजरात के बहादुर शाह और शेर शाह सूरी से भी जूझना पड़ा, दोनों ने ही उसके शासन के लिए महत्वपूर्ण खतरे पैदा किए।
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हुमायूं के शासनकाल में सबसे अहम नाकामियों में से एक शेर शाह सूरी से उसकी हार थी। 1539 में चौसा की लड़ाई में हुमायूं को शेर शाह से करारी हार का सामना करना पड़ा।
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अगले साल 1540 में शेर शाह ने कन्नौज की लड़ाई में हुमायूं को निर्णायक रूप से हरा दिया, जिससे उसे भारत से भागने पर मजबूर होना पड़ा।
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