बदनसीब मुगल बादशाह...ना 'दिल्ली' मिली ना दफन को 'दो गज जमीन'

Ravi Vaish

Sep 18, 2025

​​मुगल साम्राज्य के अंतिम बादशाह​​

बहादुर शाह जफर, मुगल साम्राज्य के अंतिम बादशाह थे, जिन्होंने 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों के अधीन रहने का फैसला किया

Credit: Wikimedia/Social Media

​​बहादुर शाह जफर​​

1857 की क्रांति के बाद, अंग्रेजों ने उन्हें रंगून (अब म्यांमार) भेज दिया, जहां वे एक कैदी की जिंदगी जीने को मजबूर हुए

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नई किताबों में 'मुगल'

​​देश में दफन होने की इच्छा​​

बादशाह बहादुर शाह जफर ने अपनी मृत्यु के बाद अपने ही देश में दफन होने की इच्छा व्यक्त की थी

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​अंग्रेजों ने इस इच्छा को पूरा नहीं किया​​

लेकिन अंग्रेजों ने उनकी इस इच्छा को पूरा नहीं किया उन्हें रंगून में ही दफन कर दिया गया

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​​'दो गज जमीन भी न मिली कु-ए-यार में...'​​

'कितना बदनसीब है जफर दफ्न के लिए, दो गज जमीन भी न मिली कु-ए-यार में...', 'कू-ए-यार' का अर्थ है 'दोस्तों की गली' या 'मित्रों का रास्ता'

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​​वतन से कोसों दूर रंगून में कैदी​​

आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर जब अपने वतन से कोसों दूर रंगून में कैदी बनकर रह रहे थे

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​​बेबसी को बयां किया था​​

तब उन्होंने इस पक्तियों के जरिये अपनी बेबसी को बयां किया था जिसका इतिहास में जिक्र है

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​​अपने ही देश में पराया बना दिया गया​​

1857 की क्रांति के बाद, उन्हें अपने ही देश में पराया बना दिया गया और उन्हें दफन करने के लिए भी दो गज जमीन नहीं मिली

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​​देश में सम्मानपूर्वक दफन करने की जगह नहीं मिली​​

यह सच्चाई है कि भारत के अंतिम मुगल बादशाह को अपने ही देश में सम्मानपूर्वक दफन करने की जगह नहीं मिली थी

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