Jan 10, 2026
सेना के दस्ते में बैक्ट्रियन ऊंट, ज़ांस्कर पोनी, रैप्टर्स और भारतीय सेना के कुत्ते शामिल हैं।
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कई बार इन “मूक योद्धाओं” ने सैनिकों की जान बचाई है और अपनी जान की परवाह नहीं की।
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परेड में शामिल चार शिकारी पक्षी (रैप्टर्स) सेना की नई और स्मार्ट सोच को दिखाते हैं. इनका इस्तेमाल निगरानी और हवाई सुरक्षा से जुड़े कामों में किया जाता है
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ये ऊंट लद्दाख के ठंडे और ऊंचे इलाकों में तैनात हैं और 250 किलो तक सामान ढो सकते हैं।
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कम पानी-चारे में लंबी दूरी तय कर सकते हैं, जिससे सेना को रसद पहुंचाने में मदद मिलती है।
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इसके बाद कदम से कदम मिलाकर चलेंगी ज़ांस्कर पोनी, जो लद्दाख की एक दुर्लभ और स्वदेशी नस्ल हैं। आकार में छोटी होने के बावजूद इनमें जबरदस्त ताकत और सहनशक्ति होती है।
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इस परेड का सबसे भावुक हिस्सा होंगे भारतीय सेना के कुत्ते, जिन्हें प्यार से “मूक योद्धा” कहा जाता है। इन कुत्तों को मेरठ स्थित रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स केंद्र में प्रशिक्षित किया जाता है।
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साल 2020 से सैनिकों के साथ सेवा दे रही हैं, दिन में 70 किलोमीटर तक गश्त करती हैं।
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26 जनवरी की परेड में पशु दस्ते देशभक्ति और सेना की ताकत का अनोखा और भावनात्मक दृश्य पेश करेंगे।
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