Sep 24, 2025
मुगल हरम में बदशाह के कदम रखते ही अंदर उत्सव का माहौल होता था। दासियां बादशाह के कपड़े उतारना शुरु कर देती थीं। वहीं कुछ दासियां बादशाह को पंखा झेलने लगती थीं और बादशाह की सेवा में जुट जाती थीं।
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बादशाह को खुश करने के लिए महिलाएं तत्पर रही थी। बादशाह के कपड़े उतारने के बाद दासियां उन्हें खुशबूदार जल और तेल से मालिश करने लगती थीं, ताकि बादशाह खुश हों और तरोजाता महसूस करें। वहीं, हरम में संगीत का भी इंतजाम किया जाता था ताकि बादशाह खुश हो जाएं।
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हरम में बादशाह के लिए तरह-तरह के शराब का इंतजाम किया जाता था और रानी खुद अपने हाथों से बादशाह को जाम परोसती थीं। ऐसे माहौल के बीच महिलाएं भी शराब की आदी हो जाती थीं।
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शराब के बाद नाच गाने का दौर तब तक चलता था जब तक बादशाह का मन बिस्तर पर जाने की न हो जाए। इसके बाद बादशाह किसी महिला को पंसद कर सोने चले जाते। बादशाह की ये अय्याशी हर रोज चलती थी।
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बादशाह का हरम में जाना रानी को पसंद नहीं था लेकिन वो कुछ कर नहीं सकती थी। नाराजगी के बावजूद उन्हें खुश रहना होता था।
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रानी का गुस्सा हरम की दाषियों पर फूट पड़ता। अक्सर ऐसा होता कि जिन दाषियों के साथ राजा समय बिताते थे, उन्हें रानी के आदेश पर ऐसी जगह भेज दिया जाता था, जहां पर कभी उसकी मुलाकात राजा से दोबारा न हो।
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मुगल हरम में बेगमों और शहजादियों की देखभाल भी जबरदस्त ढंग से होती थी।
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मुगल हरम में बेगमों और शहजादियों की देखभाल के लिए जितनी औरतें रखी जातीं उतनी ही संख्या में किन्नरों को भी जगह दी जाती थी।
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ये किन्नर भी वही काम करते थे जो दासियां करती थीं। कई-कई बार तो बेगमों और शहजादियों की खिदमत सिर्फ किन्नर ही करते थे।
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