Sep 28, 2025
सन् 1526 में मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई थी। बाबर ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल साम्राज्य स्थापित किया था। इसके बाद 1857 तक मुगल साम्राज्य भारत में राज करता रहा।
Credit: Twitter
पुराने समय में राजा अपनी आत्मकथा लिखकर जाते थे, जो कि भविष्य के लिए एक प्रमाणित दस्तावेज होती थी। मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर ने भी अपने आत्मकथा लिखी थी।
Credit: Twitter
बाबर ने बाबरनामा में बड़ी बेबाकी के साथ बाबरी के साथ अपने इश्क के किस्से को दुनिया के सामने रखा है। बाबर ने आगे लिखा है 'मगर हाल ये था कि अगर कभी बाबरी मेरे साथ आ जाता था तो मारे शर्म के मैं निगाह भरकर भी उसकी तरफ न देख सकता था।
Credit: Twitter
बाबर ने अपनी आत्मकथा तुर्की भाषा में लिखी थी जिसका नाम था तुज़्क-ए-बाबरी और जिसे बाबरनाम भी कहा जाता है। तुज़्क-ए-बाबरी यानी बाबरनामा में बाबर ने अपनी पहली शादी के बारे में जिक्र किया है।
Credit: Twitter
बाबर को निकाह में विशेष दिलचस्पी नहीं थी। पत्नी आयशा से निकाह के तीन साल बाद बेटी का जन्म हुआ, लेकिन मात्र 40 दिन के अंदर ही उसकी मौत हो गई।
Credit: Twitter
इस आत्मकथा में कई चौंकाने वाली बातेंलिखी थी। बाबरनामा में मुगल बादशाह ने एक लड़के से हुए इश्क का भी जिक्र किया था।
Credit: Twitter
बाबरनामा में बाबर ने बाबरी नाम के लड़के से अपने इश्क की कहानी को बयां किया है। बाबर ने लिखा है 'उर्दू बाजार में एक लड़का था। उसका नाम बाबरी था, जिसमें हमनामी (एक जैसा नाम) की भी एक मुनासबत थी। उन्हीं दिनों में मुझे उसके साथ अजीब लगवा पैदा हो गया।
Credit: Twitter
बाबर ने बाबरनामा में बाबरी से हुई अचानक मुलाकात का जिक्र करते हुए लिखा है," जब बाबरी से मेरा आमना सामना होता तो मेरी अजीब हालत हो जाती। ऐसा लगता कि मैंने अपना होश खो दिया। आंख उठाकर देखना या बात करना तो मुमकिन न था, बहुत छेंपता हुआ और घरबराता हुआ मैं आगे बढ़ जाता।
Credit: Twitter
बाबर का ये किस्सा, तुज्क-ए-बाबरी के उर्दू तर्जुमे से लिया गया है. जिसे मोहमडन प्रिंटिंग वर्क्स दिल्ली ने 1924 में छपवाया है।
Credit: Twitter
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स