Aug 06, 2023

मोक्ष के लिए राजा ने खुद को चीर दिया, ये है परंपरा

Ayush Sinha

​कई किस्से हैं प्रसिद्ध​

मोक्ष नगरी काशी में संस्कृति और प्राचीन कथाओं जुड़े कई प्रसिद्ध किस्से हैं।

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​काशी करवट की अफवाहें​

मणिकर्णिका कुंड के सामने एक तिरछा (टेढ़ा) मंदिर है, जिसे कुछ लोग काशी करवट कहते हैं।

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​रत्नेश्वर महादेव है वो मंदिर​

असल में भीमेश्वर महादेव के मंदिर को काशी करवत कहते हैं। तिरछे मंदिर का नाम रत्नेश्वर महादेव है।

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​करवत या करवट?​

लोग करवत और करवट को लेकर भी थोड़े कन्फ्यूज रहते हैं। करवट और करवत दो अलग शब्द है।

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​करवत का अर्थ है आरा​

असल में 'करवत' हिंदी का शब्द है, उसका मतलब होता है आरा... लकड़ी काटने वाले यंत्र को आरा कहते हैं।

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​मोक्ष के लिए प्राण दान​

काशी में मोक्ष के लिए लोग प्राण दान करते थे, वह करवत की प्रथा द्वापरकाल से शुरू हुई है।

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​कथाओं में है इसका वर्णन​

मोरंग ध्वज कथा का वर्णन सत्य नारायण व्रत कथा में किया गया है। जिन्होंने अपने बच्चे का दाहिना अंग आरे से चीर कर भगवान कृष्ण को दिया।

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​मोरंग ध्वज को मिला मोक्ष​

भगवान कृष्ण प्रसन्न हुए मोरंग ध्वज को दर्शन दिया और बच्चे को भी पुर्नजीवित किया और राजा को आशीर्वाद दिया कि तुमको मोक्ष मिले।

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​खुद को आरे से चीर दिया​

मोक्ष के लिए मोरंग ध्वज उसी आरे को लेकर काशी आए और काशी में खुद को चीर कर प्राण दान किए। वही स्थान काशी करवत कहलाता है।

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​25 फीट नीचे है शिवलिंग​

इस मंदिर में भीमा शंकर विराजमान हैं। भीमेश्वर महादेव का शिवलिंग जमीन से करीब 25 फीट नीचे है।

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