Jan 06, 2026

इंग्लिश दूर की बात, हिंदी भी नहीं चलती, भारत के इस क्षेत्र में केवल संस्कृत के दीवाने लोग

Nitin Arora

​​प्राचीन काल ​​

हमारे लगभग सभी प्राचीन ग्रंथ और पुराण संस्कृत में लिखे गए हैं, जिसे प्राचीन काल में एक पवित्र भाषा माना जाता था।

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​​18वीं सदी​​

18वीं सदी में भारत में यूरोपीय लोगों के आने से संस्कृत की ज्ञान और समझ की भाषा के रूप में प्रतिष्ठा कम हो गई।

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​​ब्रिटिशों का दौर​​

अंग्रेजी ब्रिटिश उपनिवेशवादियों द्वारा लाई गई थी; जल्द ही इसने सरकार, शिक्षा और विज्ञान की भाषा के रूप में संस्कृत की जगह ले ली।

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​​संस्कृत भाषा​​

लेकिन क्या संस्कृत भाषा का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म हो गया है? नहीं, भारत में एक ऐसा गांव है जहाँ सिर्फ संस्कृत बोली जाती है।

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​कर्नाटक के शिमोगा जिले में आज भी एक ऐसी आबादी है जो संस्कृत बोलने पर गर्व करती है। ​

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​​मत्तूर गांव​​

कर्नाटक में तुंगा नदी के किनारे बसा मत्तूर गांव, जिसकी एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है, इसको संस्कृत बोली का गांव कहा जाता है।

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​​सिर्फ पूजा-पाठ नहीं​​

इस इलाके में न सिर्फ पूजा-पाठ के लिए संस्कृत का इस्तेमाल होता है, बल्कि कई लोग रोजाना बातचीत में भी इसका इस्तेमाल करते हैं।

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