Nov 24, 2025
धर्मेंद्र का सियासी सफर राजस्थान से शुरू हुआ था। 2004 में उन्होंने बीकानेर लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की।
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उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार रामेश्वर डूडी को करीब 57 हजार वोटों से हराया था। चुनाव प्रचार के दौरान उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल भी बीकानेर पहुंचे थे।
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सांसद बनने के बाद धर्मेंद्र का सफर आसान नहीं रहा। चुनाव के लगभग एक साल बाद उनके खिलाफ नाराज़गी बढ़ने लगी। वजह थी-अपने संसदीय क्षेत्र से दूरी।
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बीकानेर शहर में जगह-जगह “धर्मेंद्र गुमशुदा है” के पोस्टर लगाए गए। यह घटना उस समय राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई थी।
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दूसरे दल के नेता आरोप लगाते थे कि वो अपने लोकसभा क्षेत्र में कम और मुंबई में ज्यादा समय बिताते हैं।
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एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "ये जगह उनके लिए ठीक नहीं है।"
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अपने कार्यकाल के अंतिम समय में धर्मेंद्र ने साफ कर दिया था कि राजनीति उनके लिए नहीं है। 2009 में उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया और मुंबई लौट गए।
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धर्मेंद्र ने बीकानेर के प्रतीक माने जाने वाले सूरसागर झील के सौंदर्यीकरण में अहम भूमिका निभाई।
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धर्मेंद्र का सफर फिल्मों से लेकर संसद तक अलग और अनोखा रहा। जहां फिल्मों में उन्होंने ही-मैन की छवि बनाई, वहीं असल जीवन में वह बेहद सरल और भावुक इंसान थे।
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