Oct 30, 2025
लद्दाख की वादियों में बसा छोटा-सा कस्बा द्रास, जहां तापमान -60°C तक चला जाता है। यह जगह भारत की नहीं, पूरी दुनिया की हिम्मत की मिसाल है।
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द्रास को “Gateway to Ladakh” कहा जाता है क्योंकि यह श्रीनगर से कारगिल जाते समय पहला बड़ा ठिकाना है।
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1995 में यहां -60°C तक तापमान दर्ज हुआ था। यह दुनिया में सिर्फ साइबेरिया के बाद दूसरी सबसे ठंडी आबाद जगह है।
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समुद्र तल से करीब 10,990 फीट की ऊंचाई पर बसा यह कस्बा, सर्दियों में पूरी तरह बर्फ की चादर में ढक जाता है।
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यहां के स्थानीय लोग ऊन, याक की खाल और पारंपरिक हीटरों से खुद को बचाते हैं। उनकी जिंदगी का हर दिन ठंड के खिलाफ एक जंग जैसा होता है।
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यहां के घर मोटी दीवारों वाले होते हैं, छोटे खिड़कियों के साथ ताकि ठंडी हवा अंदर न आए। हर घर में लकड़ी का चूल्हा होता है जो गर्मी की जान है।
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भारत की धरती पर स्थित यह जगह बताती है कि हिम्मत, जज़्बा और जिंदगी — तापमान से नहीं डरते।
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द्रास की खूबसूरती और इसके मौसम का अनुभव करने दुनिया भर से सैलानी आते हैं।
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द्रास सिर्फ ठंड के लिए नहीं, बल्कि 1999 के कारगिल युद्ध की वीरगाथा के लिए भी मशहूर है।
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