Nov 05, 2025

​डाक से भी पड़ सकता है वोट, किसे मिलती है यह सुविधा? ​

Piyush Kumar

​चर्चा में क्यों है पोस्टल बैलेट?​

हाल ही में पोस्टल बैलेट का मत मोबाइल से फेसबुक पर अपलोड किए जाने के मामले में किशनगंज सदर थाना में प्राथिमिकी दर्ज करवाई गई है। प्राथमिकी दो नामजद और अन्य के विरुद्ध दर्ज करवाई गई है।

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​​क्या है पोस्टल बैलेट?​​

पैस्टल बैलेट यानी डाक से वोट डालने की एक प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता मतदान केंद्र गए बिना अपना मत डाक से भेजते हैं।

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​​ पोस्टल बैलेट पेपर से भी होता है मतदान ​​

देश कुछ लोगों को पोस्टल बैलेट पेपर से मतदान का अधिकार मिला हुआ है। आइए जानते हैं कि चुनाव में पोस्टल बैलेट पेपरस से मतदान का अधिकार किसके पास है?

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​कोविड मरीजों ने भी डाले थे पोस्टल बैलेट से वोट​

कोविड-19 के दौर में कोरोना महामारी से संक्रमित मरीजों को भी पोस्टल बैलेट से वोट डालने की सुविधा दी गई थी।

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​दिव्यांग, बुजुर्गों को भी सुविधा​

वहीं, 80 से अधिक उम्र के मतदाता, दिव्यांग भी पैस्टल बैलेट से वोट डाल सकते हैं।

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​किसे मिलता है मौका?​

चुनाव में तैनात कर्मचारी, अर्दसैनिक बल में काम करने वाले जवान और राज्य से बाहर रह रहे कर्मचारी को यह मौका मिलता है।

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​हिरासत में रखे लोग भी डालते हैं वोट ​

जिन वोटर को हिरासत में रखा गया है वो भी पोस्टल बैलेट से मतदान कर सकते हैं। हालांकि, जेल में सजा काट हे अपराधी इसके योग्य नहीं हैं।

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​EVC से पहले होती है पोस्टल बैलेट की गिनती​

बता दें कि जब भी मतगणना होती है तब सबसे पहले पोस्टल बैलेट की ही गिनती होती है। इनकी गिनती होने के बाद ही ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू होती है।

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​कब से हुई EVM की शुरुआत?​

भारत में ईवीएम (Electronic Voting Machine) का इस्तेमाल 1982 में पहली बार केरल के पारूर विधानसभा उपचुनाव में किया गया था। बाद में 2004 के आम चुनाव में इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया।

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