Aug 08, 2023

जब 'अप्सरा' ने तोड़ दिया था विदेशियों का गुरूर, होमी भाभा ने किया था करिश्मा

Amit Mandal

​एशिया का पहला न्यूक्लियर रिसर्च रिएक्टर​

अप्सरा महज भारत देश का ही नहीं बल्कि एशिया का पहला न्यूक्लियर रिसर्च रिएक्टर था।

Credit: BARC/Twitter/Wikipedia

​ट्रॉम्बे में शुरू​

न्यूक्लियर रिसर्च रिएक्टर अप्सरा 4 अगस्त ,1956 में मुंबई के ट्रॉम्बे में शुरू किया गया था।

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​भाभा और टीम ने किया डिजाइन​

इसकी रूपरेखा, डिजाइन होमी जहांगीर भाभा और उनके सहयोगी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने तैयार की थी।

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​जवाहरलाल नेहरू ने किया उदघाटन​

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने औपचारिक रूप से 20 जनवरी, 1957 को इसका उद्धाटन किया था। अप्सरा भारत के रिसर्च रिएक्टरों में सबसे पुराना है।

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​क्या काम करता था अप्सरा​

अप्सरा लाइट वाटर स्विमिंग पूल टाइप रिएक्टर था। इसमें एक बार में एक मेगावॉट थर्मल की बिजली का प्रोडक्शन होता था। इसमें रेडियो आइसोटोप का प्रोडक्शन भी किया जाता है।

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​एनर्जी बनाई जाती थी​

रिएक्टर की भट्टी में एल्यूमिनियम यूरेनियम की मिश्रित धातु से तैयार प्लेटों को जलाकर एनर्जी बनाई जाती थी। इसमें विशेष फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता था, जो यूके से आता था।

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​2018 में अप्सरा-यू शुरू​

2009 में सुधार के लिए इसे बंद कर दिया गया था। 2018 में उच्च क्षमता का एक स्विमिंग पूल-प्रकार का अनुसंधान रिएक्टर 'अप्सरा-अपग्रेडेड' चालू किया गया था।

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​'रॉकेट बॉयज' का वो सीन​

अप्सरा रिएक्टर को टीवी शो 'रॉकेट बॉयज' में दिखाया गया है, जिसमें भाभा बने जिम सरभ शैंपेन पीते हैं और रिएक्टर के चालू होते ही उसमें कूद जाते हैं। हालांकि कूदने वाली बात सही नहीं थी।

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​भाभा से लगाई शर्त​

होमी भाभा और यूनाइटेड किंगडम परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान के निदेशक जॉन कॉकक्रॉफ्ट ने शर्त लगाई थी कि क्या यूके का फैब्रिकेटेड ईंधन पट्टे पर देने के समझौते के 12 महीने के भीतर भाभा पहला भारतीय रिएक्टर शोध शुरू कर सकते हैं।

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​डॉ. भाभा ने कर दिखाया​

लेकिन डॉ. भाभा और उनकी टीम ने इसे कर दिखाया था। बता दें कि अप्सरा को अब संग्रहालय में तब्दील किए जाने की परियोजना पर काम चल रहा है। लोग इसे नजदीक से देख सकेंगे।

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