Jun 09, 2025
By: Medha Chawlaसद्गुरु के अनुसार हम क्या खाते हैं से ज्यादा जरूरी है कि हम कैसे खाते हैं। यही बात हमारी जीवन शक्ति, मानसिक स्पष्टता और दीर्घकालिकता को निर्धारित करती है। इसके लिए उन्होंने 4 प्रमुख बातें कही हैं।
Credit: canva
पहला नियम है कि जो भी आप खाएं, उसको लेकर आपके पास जागरूकता होनी चाहिए। अगर आप अलर्ट होंगे तो जंक खाने से बचेंगे।
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सद्गुरु कहते हैं कि खाने का आदर करें। लेकिन भावनाओं में बहकर खाना ना खाएं। यह जानें कि शरीर को क्या चाहिए, बजाय इसके कि आप भावनात्मक या आदतन इच्छाओं को पूरा करने के खाएं।
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सद्गुरु का कहना है कि भोजन से पहले और बाद में कुछ मिनटों के लिए चुप बैठना चाहिए। इससे शरीर पाचन के लिए अच्छी तरह तैयार होता है।
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चुप बैठने से पाचन में हैरान करने देने वाला सुधार आता है। इससे फोकस बढ़ता है और अधिक खाने की आदत भी कम हो सकती है।
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खाने के मामले में सद्गुरु इस टिप को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। आप खाने को जितना चबाएंगे, उतना ही ये आपको फायदा देगा। चबाने से भोजन लार के साथ मिल जाता है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने के लिए आवश्यक एंजाइम होते हैं।
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सद्गुरु का कहना है कि लगातार कुछ न कुछ खाने की अपनी आदत को भी आपको बदलना चाहिए। मानव प्रणाली लंबे समय तक बिना भोजन के रहने के लिए डिजाइन की गई है।
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कच्ची चीजों को खाना पेट को अच्छे पाचन के लिए तैयार करता है और मुख्य भोजन के आने से पहले पाचन एंजाइमों को सक्रिय करता है।
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सद्गुरु जब कच्ची चीजें खानी की बात कहते हैं तो उनका तात्पर्य फलों, नट्स, सब्जियों और अंकुरित अनाज आदि से होता है।
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