Nov 04, 2025
Credit: Istock
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मान्यता यह है कि समुद्र मंथन की कथा में जहां-जहां राक्षस का रक्त गिरा, वहां मसूर की दाल उत्पन्न हुई। इस कारण इसे मांस से उत्पन्न माना गया।
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एक अन्य कथा बताती है कि यह दाल कामधेनु गाय के रक्त से उत्पन्न मानी गई। इसलिए इसे पवित्र आहार नहीं माना गया।
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धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि मसूर की दाल तामसिक प्रवृत्ति बढ़ाती है जैसे गुस्सा, कामेच्छा, आलस्य जैसी भावनाओं को बढ़ावा देती है।
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