Nov 04, 2025

वेज नहीं नॉनवेज मानी जाती है ये दाल, अंडा-चिकन का है बाप, प्रोटीन का कहलाती है सरताज

Vineet

​अरहर, चना, मूंग, उड़द और मसूर आदि दालें भारत में रोजमर्रा के खाने का अहम हिस्सा हैं। ​

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​पर क्या आपने सुना है कि इसी बीच एक दाल को वेज नहीं, बल्कि नॉनवेज मानी जाती है?​

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​उन दालों में से एक है ‘मसूर की दाल’। धर्म-मान्यताओं में इसे मांसाहारी दाल माना गया है।​

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​इसके पीछे है कारण​

मान्यता यह है कि समुद्र मंथन की कथा में जहां-जहां राक्षस का रक्त गिरा, वहां मसूर की दाल उत्पन्न हुई। इस कारण इसे मांस से उत्पन्न माना गया।

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​अन्य कथा भी है जुड़ी​

एक अन्य कथा बताती है कि यह दाल कामधेनु गाय के रक्त से उत्पन्न मानी गई। इसलिए इसे पवित्र आहार नहीं माना गया।

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​तामसिक प्रभाव​

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि मसूर की दाल तामसिक प्रवृत्ति बढ़ाती है जैसे गुस्सा, कामेच्छा, आलस्य जैसी भावनाओं को बढ़ावा देती है।

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​वैज्ञानिक दृष्टि से इसमें मांस जैसा कुछ नहीं होता, बल्कि प्रोटीन, फाइबर व आयरन भरपूर हैं।​

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​लेकिन आयुर्वेद इसे भारीपन व सुस्ती देने वाला आहार मानता है। इसे खाकर आलस बढ़ता है।​

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​मसूर की दाल को अक्सर प्रोटीन स्रोत माना जाता है जैसे मांस-अंडा का विकल्प। यह ताकत देती है।​

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