Jun 16, 2025
By: Medha Chawlaये दोनों ही प्राकृतिक रेजिन (Edible Gum) होते हैं। ये पेड़ों से मिलते हैं। आयुर्वेद में इनका उपयोग कई स्वास्थ्य लाभों के लिए होता है। दोनों देखने में एक जैसे होते हैं।
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यह बबूल से मिलती है। गोंद का रंग हल्का पीला या सफेद होता है और सूखने पर यह सख्त हो जाती है।
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यह हमें कतीरा पेड़ से मिलती है और पानी में डालने पर यह जेली में बदल जाती है। इसका रंग सफेद से हल्का गुलाबी वाला होता है।
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गोंद की तासीर गर्म होती है और इसका सेवन सर्दियों में किया जाता है। यह शरीर को एनर्जी देकर कमजोरी दूर करता है।
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इसकी तासीर ठंडी होती है और इसका सेवन गर्मियों में होता है। यह डिहाइड्रेशन की दिक्कत को दूर करती है।
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गोंद में कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर होते हैं। यह हड्डियों को मजबूत करने के साथ ही जोड़ों के दर्द में भी राहत देता है।
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यह इम्युनिटी बढ़ाता है। त्वचा को चमकदार बनाता है। नकसीर रोकता है। साथ ही पीरियड्स में ठंडक देता है।
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अलग अलग मौसम में दोनों का प्रयोग होता है। तो अपनी जगह गोंद और गोंद कतीरा दोनों ही फायदेमंद हैं।
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गोंद को लड्डू आदि में डालकर खाया जाता है। प्रसव के बाद लाभकारी है। वहीं गोंद कतीरा का प्रयोग ठंडाई, शरबत आदि में होता है।
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