Dec 30, 2025
नीली हल्दी यानी ब्लू टर्मरिक आज पीली हल्दी से ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसके फायदे अलग और ज्यादा गहरे होते हैं।
Credit: Istock/ Pinterest
नीली हल्दी का रंग अंदर से नीला-काला होता है और यह आम पीली हल्दी से अलग प्रजाति Curcuma caesia है।
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नीली हल्दी में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा अधिक पाई जाती है, जिससे शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कणों से बचाव मिलता है।
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इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पीली हल्दी की तरह सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं लेकिन कुछ मामलों में यह ज्यादा प्रभावी मानी जाती है।
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परंपरागत प्रयोगों में नीली हल्दी को एलर्जी और गले की खराश से आराम देने में उपयोग किया जाता रहा है।
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अध्ययन के अनुसार यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है, संक्रमण से लड़ने में मदद करती है और फेफड़ों को भी आराम देती है।
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नीली हल्दी आम मसाले की तरह हर रोज़ खाने में नहीं डाली जाती, बल्कि औषधि की तरह सीमित मात्रा में उपयोग की जाती है।
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इसलिए पीली हल्दी की तुलना में नीली हल्दी कुछ खास बीमारियों, जैसे सूजन, एलर्जी और प्रतिरोधक क्षमता में सुधार जैसे मामलों में थोड़ी ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है।
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प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
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