Oct 17, 2024
सीट इजेक्शन बहुत जरूरी टेक्निक है, क्योंकि अगर विमान युद्ध में या परीक्षण के दौरान क्षतिग्रस्त हो जाता है और पायलट को अपनी जान बचानी हो तो वो सीट इजेक्शन के जरिये बाहर निकल जाता है।
Credit: TNN
बता दें, फाइटर जेट या फाइटर प्लेन का पायलट जब सीट पर बैठता है, तो उसकी पीठ पर पैराशूट लगा होता है, वो जैसे ही सीट इजेक्शन का प्रयोग करता है, पैराशूट खुल जाता है।
Credit: TNN
पैराशूट की मदद से पायलट धीरे धीरे करके जमीन पर सुरक्षित तरीके से उतर जाता है, इसीलिए पायलट को सभी विषम स्थितियों के लिए पहले से ट्रेनिंग दी जाती है।
Credit: TNN
अब रही बात कि फाइटर प्लेन की तरह हेलीकॉप्टर में सीट इजेक्शन की सुविधा क्यों नहीं होती जबकि हेलीकॉप्टर भी युद्ध में भाग लेते हैं।
Credit: TNN
बता दें, हेलीकॉप्टर में तेज तर्रार पंख लगे होते हैं, अगर सीट इजेक्शन की सुविधा हुई भी तो पायलट हेलीकॉप्टर से निकलकर सीधे पंखों से जा लड़ेगा।
Credit: TNN
वैसे जानकारी के लिए बता दें, कि अब ऐसी टेक्निक पर भी काम किया जा रहा है कि पायलट हेलीकॉप्टर से भी इमर्जेंसी में निकल सकें।
Credit: TNN
टेक्नोलॉजी समय व दिन के साथ साथ एडवांस होती जा रही है, इसीलिए सुविधा का लेवल भी अच्छे से बेस्ट होता जा रहा है, और अपने योद्धाओं की जान बचाना प्राथमिकता होती है।
Credit: TNN
हेलीकॉप्टर में सीट इजेक्शन का प्रयोग आम होने वाला है, इसके लिए पहले एक बटन दबाना होगा, जिससे हेलीकॉप्टर के पंख अलग हो जाएंगे।
Credit: TNN
इसके बाद दूसरे बटन से हेलीकॉप्टर का पायलट फाइटर प्लेन की पायलट की तरह एक झटके में बाहर निकल जाएगा और सुरक्षित रूप से लैंड कर सकेगा।
Credit: TNN
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स