दवाई के कैप्सूल रंग बिरंगे क्यों होते हैं, नहीं जाना तो पछताएंगे

Aditya Singh

Mar 10, 2025

​बीमार होने पर​

आपके घर में भी जब कोई बीमार होता होगा तो आप उसे सबसे पहले डॉक्टर के पास ले जाते होंगे।

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​दवाइयां लेने की सलाह​

डॉक्टर बीमारी को डायग्नोस करके कुछ दवाइयां लेने की सलाह देते हैं। ऐसे में आपने देखा होगा कि अधिकतर दवाइयां रंग बिरंगी होती हैं।

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​दवाई के कैप्सूल रंग बिरंगे क्यों होते हैं​

लेकिन क्या आप जानते हैं कि दवाई के कैप्सूल रंग बिरंगे क्यों होते हैं।

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​नहीं जाना तो पछताएंगे​

अगर आप भी नहीं जानते हैं कि दवाई के कैप्सूस रंग बिरंगे क्यों होते हैं तो यहां जान लीजिए। नहीं जाना तो आप भी पछताएंगे।

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​कब से मिलनी शुरू हुई​

उपलब्ध जानकारी के अनुसार पहली बार रंग बिरंगी दवाई 1960 के दशक में मिलनी शुरू हुई।

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​दवाई को पहचानने में मदद​

बता दें जब कोई मरीज एक साथ कई दवाइयां लेता हैतो अलग अलग रंगों की गोलियों से उसे अपनी दवा पहचानने में मदद मिलती है।

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​मरीजों के लिए मुश्किल​

अगर गोली का रंग एक ही यानी सफेद होगा तो मरीज को इसे पहचानने में मुश्किल हो जाता है।

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​क्या कहता है शोध​

अमेरिका के किए गए एक शोध के मुताबिक रंग बिरंगी दवाइयां इमोशनल अपील के लिए अच्छी होती हैं।

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​यहां समझें दवाइयों का रंग​

कहा जाता है कि आमतौर पर दर्द निवारक, एंटी एंग्जयटी और नींद की दवाएं नीली और हरी होती हैं। वहीं एनर्जी बूस्टर वाली दवाओं का रंग ज्यादातर लाल और नारंगी होता है।

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