Dec 28, 2024
आप सोच रहे होंगे इसमें क्या नया है, लेकिन ये बहुत बड़ा प्वॉइंट है, इस जानकारी के बारे में सभी को पता होना चाहिए।
Credit: Meta AI and Canva
एयरप्लेन में दो पायलट होते हैं, दूसरे पायलट को को-पायलट कहते हैं। ये दोनों एक दूसरे का खाना चाह कर भी नहीं खा सकते हैं।
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बात 1984 की है, जब लंदन और न्यूयॉर्क के बीच उड़ रहे सुपरसोनिक विमान में सभी यात्री और चालक दल के सदस्य फूड पॉइजनिंग की चपेट में आ गए थे।
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इसका कारण साफ था कि सभी ने एक किचन का बड़ा व एक मैटैरियल का बना खाना खाया था।
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इस घटना के बाद से सभी एयरलाइंस ने यह तय किया कि दोनों पायलटों को अलग-अलग भोजन दिया जाए।
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ताकि अगर किसी एक पायलट को खाने से दिक्कत हो, तो दूसरा स्वस्थ्य रहे, और विमान को सुरक्षित तरीके से उतार सके।
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अगर किसी खाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो सकती है, तो ये रिस्क दोनों पायलट को नहीं लेने दिया जाता है।
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ऐसा करना केवल पायलट की सेफ्टी नहीं दर्शाता, बल्कि इसका मुख्य कारण प्लेन में मौजूद सभी का ख्याल करना है।
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एयरलाइंस अपने पायलटों को सादा और हल्का भोजन देती हैं, ताकि उड़ान के दौरान उन्हें असहज न महसूस हो।
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