इंजीनियरिंग से निकले दो चेहरे, एक बना वेदांताचार्य तो दूसरा IIT बाबा

Neelaksh Singh

May 30, 2025

​जोनास मासेटी /IIT बाबा​

इन दोनों चेहरों को अगर नहीं पहचानते तो आज जान लीजिये। एक तरफ हैं जोनास मासेटी और दूसरी तरफ हैं अभय उर्फ IIT बाबा

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​जोनास मासेटी के बारे में​

इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले एक विदेशी ने भारतीय ज्ञान को अपनाया, वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इनका नाम है जोनास मासेटी, जो कि ब्राजील से आए हैं।

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​पद्मश्री से नवाजे गए जोनास मासेटी​

इन्होंने भारतीय वैदिक संस्कृति को अपनाया, और ‘वेदांताचार्य’ के रूप में वैश्विक पहचान के साथ पद्मश्री से नवाजे गए।

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​IIT बाबा​

दूसरी ओर हैं भारत के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान से निकले अभय सिंह, जो ‘IIT बाबा’ नाम से मशहूर हैं, क्योंकि इन्होंने आईआईटी से पढ़ाई की है।

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​IIT बाबा का नाम​

अभय सिंह यानी IIT बाबा सोशल मीडिया पर व्यंग्य का कारण बन चुके हैं, कभी उल्टी सीधी भविष्यवाणी कर रहे हैं तो कभी मीडिया हाउस में महागुरू पर चाय फेंकते देखे गए।

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​दोनों हैं इंजीनियर​

इन दोनों का मार्ग एक जैसे बिंदु से शुरू हुआ, इंजीनियरिंग, लेकिन एक की यात्रा वैदिक गुरु बनने तक पहुंची और दूसरे की वायरल वीडियो में उपहास तक।

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​जोनास मासेटी ने की है मैकेनिकल इंजीनियरिंग​

ब्राजील के रियो डी जनेरियो में जन्मे जोनास मासेटी ने मिलिट्री इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग (IME) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

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​ब्राजीलियाई सेना में कर चुके हैं काम​

कई सालों तक ब्राजीलियाई सेना में सेवाएं देने के बाद वे स्टॉक मार्केट में स्ट्रैटेजिक कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत रहे। लेकिन उन्हें एक आध्यात्मिक खालीपन महसूस हुआ।

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​योग और वेदांत की ओर आकर्षण​

इस आंतरिक खोज ने उन्हें योग और वेदांत की ओर खींचा। 2003 में उन्होंने इस राह की शुरुआत की और धीरे-धीरे ग्लोरिया एरिएरा और फिर स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य बन गए। भारत के कोयंबटूर स्थित अर्ष विद्या गुरुकुलम में उन्होंने चार साल तक ट्रेनिंग ली।

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​150,000 बच्‍चों तक पहुंचे​

2014 में वे ब्राजील लौटे और पेट्रोपोलिस में विश्व विद्या गुरुकुलम की स्थापना की। यहां वेदांत, भगवद् गीता, संस्कृत और वैदिक परंपराएं पढ़ाई जाती हैं। उनका यह मिशन आज 150,000 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है। भारत सरकार ने 2025 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।

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