Jun 18, 2025
डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने अपने एक वीडियो में बताया कि वो कैसा बनना चाहते हैं, उन्होंने बताया कि सुक्रात का शिष्य प्लेटो था, मैं उन्हीं की तरह बनना चाहता हूं।
Credit: canva and tnn
हालांकि उन्होंने कहा कि वे प्लेटो जैसे बौद्धिक तो नहीं हैं, लेकिन हां प्लेटो जैसा विनम्र रहता चाहता हूं।
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उन्होंने बताया कि सुक्रात ने प्लेटो को बहुत सिखाया, प्लेटो ने बहुत किताबें लिखीं, और प्लेटो ने एक भी किताब में एक भी बार कोई वाक्य अपना कहकर नहीं लिखा।
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प्लेटो ने अपनी किताब में लिखे सारे वाक्य 'सुक्रात के कहकर' लिखें। प्लेटो का मानना था कि उन्होंने किताब में जो भी लिखा उसका मूल भाव तो सुक्रात से आया है।
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क्या आप जानते हैं, यहां जिस प्लेटो की बात हो रही है, उन्हीं का शिष्य का 'अरस्तु'
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ये वही अरस्तु था जिसने प्लेटो के सारे सिद्धांतो को सिर के बल खड़ा कर दिया।
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अरस्तु भी महान विचारकों में से एक रहे हैं, मगर उनमें अहंकार की भी झलक थी।
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अरस्तु ने महिलाओं को लेकर उटपटांग बाते कही, दासों के बारे में गलत बोला, शायद यही कारण था कि अरस्तु का शिष्य कोई महान विचारक नहीं बना, बल्कि 'सिकंदर' बना।
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डॉ विकास सर की इस छोटी सी कहानी से यही सीख मिलती है कि अक्रामक अध्यापक का विद्यार्थी अकाम्रक हो सकता है, इसलिए सबसे जरूरी है आपकी संगति कैसी है, उस पर गौर करिये।
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