Oct 31, 2026
भारत के साथ दुनिया के विभिन्न देशों में जलसंधियां हुई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया किस जलसंधि को 'आसुओं का द्वार' कहा जाता है।
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अगर आप भी अपनी GK मजबूत करना चाहते हैं तो आपके लिए इस सवाल का जवाब जानना जरूरी है।
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जिस जलसंधि को आंसुओं का द्वार कहा जाता है, उसका नाम "बाब-अल-मंदेब जलसंधि" है।
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अरबी भाषा में 'बाब-अल-मंदेब' का शाब्दिक अर्थ 'आंसुओं का द्वार' होता है। इसलिए इसका नाम यह पड़ा।
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यह जलसंधि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ती है।
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यह जलसंधि एशियाई महाद्वीप (यमन देश) को अफ्रीकी महाद्वीप (जिबूती और इरिट्रिया) से अलग करने का काम करती है।
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यह वैश्विक व्यापार के लिए एक प्रमुख जलमार्ग है। यूरोप और एशिया के बीच होने वाला एक बहुत बड़ा व्यापारिक यातायात इसी मार्ग से होकर गुजरता है, जो स्वेज नहर से जुड़ा हुआ है।
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भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री 'चेकपॉइंट्स' में से एक माना जाता है। इस जलडमरूमध्य की सबसे संकीर्ण जगह पर चौड़ाई लगभग 26 किलोमीटर (16 मील) के आसपास है, जो इसे दो महाद्वीपों के बीच एक संकरा रास्ता बनाती है।
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इस जलसंधि के बीच में पेरिम द्वीप स्थित है, जो इस जलमार्ग को दो अलग-अलग चैनलों (पूर्वी और पश्चिमी) में विभाजित करता है।
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