Nov 04, 2025
आपने इतिहास में कई बार शेरशाह सूरी का नाम सुना होगा, लेकिन ये इनका असली नाम नहीं हैं, इनका असली नाम 'फरीद' था।
Credit: canva and tnn
शेरशाह सूरी को उन चुनिंदा बादशाहों की लिस्ट में शामिल किया जा सकता है, जिनके बारे में ज्यादा पढ़ाया नहीं जाता है।
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उन्होंने केवल पांच वर्षों तक भारत पर शासन किया और उनकी मौत के दस वर्ष भी नहीं बीते थे कि उनके वंश का शासन भी समाप्त हो गया।
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शेरशाह की जीवनी 'कालिकारंजन कानूनगो' ने लिखी थी। शेरशाह सूरी का असली नाम फरीद था।
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कम लोगों का पता होगा कि उन्होंने मुगल सेना में काम किया था और बाबर के साथ 1528 में उनके चंदेरी के अभियान में भी गए थे।
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हुमायूं और शेरशाह सूरी के बीच खास नहीं बनती थी, और शेरशाह खुद को तख्त का असली दावेदार मानते थे।
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इतिहासकारों की मानें तो युद्ध कौशल के मामले में शेरशाह को हुमायूं से बेहतर माना जाता था, और ये बात हुमायूं के सैनिक भी जानते थे।
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17 मई, 1540 को कन्नौज में हुमायूं और शेरशाह सूरी की सेनाओं के बीच मुकाबला हुआ। शेरशाह की सेना में जहां 15000 के आसपास सैनिक थे, वहीं हुमायूं के पास 40000 के आसपास सैनिक थे।
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कहते हैं इस युद्ध में हुमायूं की तरफ से सैनिकों ने लड़ने से मना कर दिया, जिसके बाद बिना एक आदमी के जान गवाएं बिना शेरशाह जीत गया, और हुमायूं को हिंदुस्तान के बाहर खदेड़ दिया।
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शेरशाह को पूरे हिंदुस्तान में सड़कें और सराय बनवाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने सड़कों के दोनों तरफ पेड़ लगवाए, ताकि सड़क पर चलने वालों को पेड़ की छाया मिल सके।
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उन्होंने चार बड़ी सड़कें बनवाईं, जिनमें सबसे बड़ी थी ढाका के पास सोनारगांव से सिंधु नदी तक की 1500 किलोमीटर लंबी सड़क जिसे आज जीटी रोड कहा जाता है।
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