Oct 01, 2024
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाला छात्र हो या स्कूली जीवन का कोई स्टूडेंट, अक्सर एक चुनौती उसके सामने हर रोज सुबह आ खड़ी हो जाती है।
Credit: canva
हम बात कर रहे हैं सुबह का रूटीन दुरस्त न कर पाने की, एक फिक्स समय पर न उठ पाने की और आलस को न हरा पाने की।
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सुबह जल्दी उठने के लिए हम हर शाम कोशिश करते हैं, अलार्म लगाते हैं, एक नहीं मल्टीपल अलार्म लगाते हैं, लेकिन हर बार उसे काट भी देते हैं।
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ऐसे में Khan Sir ने बड़ी आसान भाषा में समझाया कि छात्र कहां गलती कर रहे हैं। यकी मानिये अगर आप आज से ध्यान देंगे तो नींद मनचाहे समय पर खुलेगी।
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अगर आप देर से सोते हैं, तो देर से ही उठेंगे, फिर देर से सोएंगे और ये रूटीन एक सप्ताह तक बना सकता है। इससे आपका स्लीप टाइम डिस्टर्ब हो जाएगा।
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ज्यादातर छात्रों के सामने उनकी परेशानी उनका मोबाइल है, वे उठते ही मोबाइल चलाने लगते हैं, चैट देखते देखते कब रील्स पर पहुंच जाते हैं और फिर कब आधा घंटा पार हो जाता है, पता नहीं चलता।
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शाम को भी कई छात्र यही करते हैं, पढ़ने से पहले मोबाइल चलाते हैं, रील्स देखने में बहुमूल्य समय चला जाता है, अंतरआत्मा पढ़ने के लिए कहती है, लेकिन छात्र समय की वैल्यू नहीं कर पाते।
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ऐसे में छात्र देर रात तक पढ़ने के लिए मन और दिमाग को तैयार करते हैं, और फिर जब देर रात पढ़ने बैठेंगे तो नींद घेरने लगती है क्योंकि आपने अपना दिमाग और आंखें मोबाइल में थका दिया होता है।
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ऐसे में ठान कर सोने की कोशिश करें कि मुझे इस समय सोना ही है, यकी मानिये कुछ दिनों में जल्दी सुबह आंख अपने आप खुलने लगेगी।
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एक और चीज, जल्दी सोने के लिए जल्दी डिनर करना होगा, ताकि आपके सोने के समय और डिनर कम्प्लीट करने के बीच एक पर्याप्त अंतर हो।
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